छत्तीसगढ़ के बस्तर की बात आते ही अक्सर लोगों के दिमाग में सिर्फ घने जंगल आते हैं, लेकिन जो लोग यहाँ घूम चुके हैं, वे जानते हैं कि यह जगह प्रकृति का छुपा हुआ खजाना है। इसी खजाने का एक अनमोल हीरा है— तीरथगढ़ जलप्रपात (Tirathgarh Waterfall)।अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहाँ दूर-दूर तक सिर्फ पानी की गर्जना और ठंडी हवा का अहसास हो, तो तीरथगढ़ का यह सफर आपके दिल को छू जाएगा।

जब दूध की नदियां चट्टानों से उतरती हैं

तीरथगढ़ झरना कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park) के शांत और घने जंगलों के बीच बसा है। लगभग 300 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना किसी एक सीधी धार में नहीं, बल्कि कई सीढ़ियों (Cascades) की तरह चट्टानों से होकर नीचे आता है। जब सफेद पानी काले-भूरे पत्थरों से टकराकर नीचे गिरता है, तो लगता है जैसे पहाड़ पर दूध की चादर बिछ गई हो। आसपास उड़ती हुई पानी की हल्की फुहारें आपके चेहरे से टकराती हैं, तो सफर की पूरी थकान एक पल में गायब हो जाती है।

 

Tirathgarh Waterfall in Kanger Valley National Park, Bastar, Chhattisgarh with cascading multi-tiered waterfalls surrounded by lush green forest.

Tirathgarh Waterfall – A breathtaking multi-tiered waterfall in Bastar, Chhattisgarh, surrounded by the lush forests of Kanger Valley National Park

झरने के तल तक जाने का रोमांच  यहाँ का सबसे खूबसूरत अहसास है नीचे घाटी तक जाना। नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। जैसे-जैसे आप सीढ़ियां उतरते हैं, पानी के गिरने की आवाज़ तेज होती जाती है और माहौल और भी ठंडा होने लगता है।नीचे पहुंचकर जब आप झरने के पास खड़े होते हैं, तो जो ताजगी महसूस होती है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। यहाँ पास ही में एक छोटा सा शिव मंदिर भी है, जो चट्टानों के बीच बना हुआ है। बहते पानी के बीच मंदिर का यह नजारा इस जगह को एक अलग ही आध्यात्मिक और शांत रूप देता है।

सफर को यादगार बनाने के लिए कुछ खास बातें

फ़ोटोग्राफ़ी के शौकीनों के लिए जन्नत: अगर आपको कैमरे में खूबसूरत लम्हे कैद करने का शौक है, तो यहाँ के व्यू पॉइंट्स से झरने के कई बेहतरीन एंगल मिलते हैं।चाय और भुट्टे का मज़ा: झरने के ऊपरी हिस्से पर स्थानीय लोग गरमा-गरम चाय, मैग्गी और सिंका हुआ देसी भुट्टा बेचते हैं। ठंडी हवा के बीच गर्म चाय का घूंट लेना अलग ही आनंद देता है।आसपास की जगहें:  तीरथगढ़ आए हैं तो पास ही स्थित ‘कुटुमसर गुफाएं’ (Kutumsar Caves) और ‘कांगेर धारा’ देखना बिल्कुल न भूलें।

तीरथगढ़ जाने का सही समय और जरूरी बातें

कब जाएं ?
अक्टूबर से मार्च का समय तीरथगढ़ घूमने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और झरने में पानी की मात्रा भी भरपूर रहती है। मानसून (अगस्त-सितंबर) में यह झरना अपने पूरे शबाब पर होता है, लेकिन सीढ़ियों पर थोड़ी फिसलन हो सकती है।

कैसे पहुंचे ?
तीरथगढ़, बस्तर के मुख्य शहर जगदलपुर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है। जगदलपुर से आप आसानी से टैक्सी, ऑटो या अपनी गाड़ी से यहाँ पहुंच सकते हैं। रायपुर यहाँ का नजदीकी एयरपोर्ट है, जहाँ से ट्रेन या बस के जरिए जगदलपुर पहुंचा जा सकता है।

कुछ छोटी-मोटी सलाह:

1. नीचे जाने और वापस ऊपर आने के लिए काफी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, इसलिए आरामदायक जूते (Sports Shoes)पहनकर जाएं।
2. अगर आप पानी के पास ज्यादा देर बिताने का मन बना रहे हैं, तो अपने साथ एक्स्ट्रा कपड़े रख लें।
3. यह एक नेशनल पार्क का हिस्सा है, इसलिए प्लास्टिक या कचरा फैलाकर यहाँ की सुंदरता को नुकसान न पहुंचाएं।

तीरथगढ़ सिर्फ देखने की जगह नहीं है, यह महसूस करने की जगह है। अगर आप प्रकृति के करीब कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो इस वीकेंड अपने बैग पैक कीजिए और बस्तर के इस अनूठे कोने का रुख कीजिए!